
ये है उस नमी की कहानी .....
जो जाहिर होना नही चाहते ,कभी दबदबाते नही ...
है डर उन्हें छलक जाने का ;
रहते हैं हमेशा..
सीमाओं में कैद ,
कभी इतराते नही
अपनी विशालता पर ;
अपनी शालीनता पर ..
उन्हें कभी नाज़ नही होता ।
अंधेरे सायों में ही
है उनका ठिकाना ,
ये दुनिया की चमक तो ,
उनके लिए है बस एक विराना ..
और जब कभी दर्द का सागर
इस कदर लहराता है ..
की पलकें उनके वजूद को छिपाने में
चुक जाते हैं ..
तब भी ये नमी दिखती नही .....
क्योंकि ये अश्क ...ख़ुद ब ख़ुद सुख जाते हैं ...

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