Sunday, June 12, 2011

मेरी याद तो आती होगी ..

पलकें अब भी वो..
उस कदर ही झुकाती होगी ...

उस तरह ही आँखों को
पल पल मटकाती होगी..

अब भी जुल्फों में
वो सफ़ेद फूल लगाती होगी..

अब भी हर काम ..
वक़्त पर भूल जाती होगी..
अब भी teddy bears ही उसे ..
अच्छे लगते होंगे .
अब भी balloons n choclates देख
खुश हो जाती होगी..


अब भी हर फैसले पर
बहुत सोचती होगी..

पर अब भी अपनी आँखों में..
काजल जरुर लगाती होगी ..
अब भी सुबह उठना उसे ..
पसंद नहीं होगा ..
अब भी kitchen के बस नाम से ही ..
चिढ जाती होगी ...

अब भी radio FM पर...
उस कदर ही झल्लाती होगी ...

अब भी गुलाम अली की ..
ग़जलें गुनगुनाती होगी ..

अब भी थिरकती हुई ..
मोरनी सी नाचती होगी ..

अब भी घर में सब को .
उँगलियों पर नचाती होगी ..
अब भी किसी बात पर ..
खूब चिल्लाती होगी..

और ..फिर रूठ कर
खुद चुप सी हो जाती होगी ...

रूठने पर,.. अब भी किसी के ...
मनाने का इंतज़ार होता होगा ...

उस वक़्त अब भी ...
मेरी याद तो आती होगी...
मेरी याद तो आती होगी ..

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