मसृण ख्वाबो सी नही
चट्टानों सी कठोर है जिंदगी
एक असहनीय दर्द,एक अनुतरिय प्रश्न
एक पहेली बेजोड़ है जिंदगी ;
किसी के लिए ईश्वरीय वरदान ,..तो
किसी के लिए भीख है जिंदगी
मानो तो एक सजा ,पर
समझो तो एक सीख है जिंदगी
तो जीवन को समझ
हर क्षण हर पल
अपनी कल्पनाओं से बाहर निकल
सपनो की जंजीर तोड़
यथार्थ से रिश्ता जोड़
भाग ,दौड़ मंजिल की ओर .....
कर तलाश सच की
धुंध खुशी को जन जन में
निर्जन वन में
लोगो की बेकारी ,और
उन्ही लोगो के फन में
बागों में,बगीचों में
युद्घ के रण में ,
अपने धन में,अपने तन में
धुंध उसे अपने मन में
इस माती में..इस अम्बर में
इन दिशाओं में ,इन हवाओं में
इस जल के कीचड़
कीचड़ की इस काई में
इन चट्टानों के पत्थर
पत्थरों की राई में
पर धुंध उसे अपने झूठ की बुनियाद
धोखे की नींव हटाकर
फ़िर देख नीचे ,देख गिरता है तू किस खाई में
सच मानो दोस्त,सुख नही मिलेगा
उस खाई में
सुख दुःख का छोटा भाई है
और मानव भले करे ..पर
इश्वर नही करता बंटवारा भाई भाई में
जिंदगी में सुख मिलतऐ हैं , तो मिलते हैं
सिर्फ़ दुःख के साये में
तो बताइए क्या है जिंदगी अब
आपकी राय में ???
Thursday, August 26, 2010
जिंदगी आपकी राय में !!!!
Posted by figments89 at 6:44:00 AM
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