Thursday, August 26, 2010

random thoughts


बारिश  के   मौसम  में 
सफ़ेद  काले  बदलो  के  बीच 
सूरज  की  ढलती  किरनें 

उन  बादलों  से  छलकते 
बूंदों  का  गिरना 
हरी  हरी  घास  के  कोपलों  पर
उन  मोतियों  का  चमकना

शब्  के  अँधेरे  में
चाँद  की  रौशनी 
और  उस  चांदनी  से  नहाती 
उस  चेहरे  की  चमक
उन  लबों  में
अधखुली  मुस्कराहट  का  बिखरना 

दूर  किसी  ढोल  की  आवाज़
किसी  शहनाई  की  तड़प
किसी  बांसुरी  की  लहर
और  उन  साजों  का  यूँ  ही  बजना
सुबह  शाम  दुपहर

एक  बड़ी  सी  बिल्डिंग...
इक  छोटा  सा  कमरा ...
अँधेरे  को  चीरती ...
लैम्प   की  हलकी  सी  रौशनी ...
और  यादें ....------

यादें ...
अनकही  अनछुई  अजीबो  गरीब .....
अनोखे  एहसास  जगाती....
कांपती  हुई  धुंधली  सी  ..
यादें ....इक  नई  दुनिया  में  ले  जाती  --------


वो  दुनिया  जो  अतीत  है  ....
क्यूँ  ? पता  नहीं  ..कब   से   ? जानता नहीं....
और  फिर  एक  ख्वाहिश ....
उसी  वक़्त  में  जाने  की ....
इक  इंतज़ार  ...उस  वक़्त  से  किसी  के  आने  की ...

फिर  कुछ  आहें ...
हवाओं  में  यूँ  अपलक  देखना 
फिर  एक  लम्बी  सी  सांस  
सुन्न  एहसास  से  किसी  वजूद  का  बहार  आना 
और  अपने  प्यारी  यादों  को 
फिर  इक  बार  सोच  मुस्कुराना 

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