Saturday, April 7, 2012

क्या हुआ ?


 यूँ   हथेलियों से  तेरी, 
कुछ  उम्मीदों   के  रेत,
फिसल   गए  ..तो  क्या  हुआ ?

तेरी   ख्वाहिशों   के   कुछ ,
रंगीन   दायेरें ..
सिमट   गए  तो  क्या  हुआ ?

क्या   हुआ   जो ,
  हो     गया  तू  उदास ;
यूँ    जीवन   के   सफ़र  में ,
कुछ   लोग ..
बिछड़   गए   तो   क्या   हुआ ..?

हर   सुबह   नयी  
किरनें   लेकर  आती   हैं 
हर  शाम  ये  किरनें .
ढल   गए   तो   क्या   हुआ . .?

हाँ , चाहता   है   भूलना ..
कुछ   लोगों   को   तेरा   मन ,
पर   कुछ   चेहरे . .यादों  में ..
बस   गए .. तो   क्या    हुआ ?

हर   पल   नजारा   खुबसूरत   हो ,
ये   जरूरी   तो   नहीं ;
कुछ   पल   बहारों   के   दीदार  को
ये   आखें ...
तरस   गए   .तो   क्या   हुआ ?

बारिशों   में   खेलने   का ,
एक   अपना   है   मज़ा ;
यूँ   मैदानों   पर   बादल ,
बरस   गए   तो   क्या  हुआ ?

दोस्तों  का  साथ  भी  कुछ ,
कम   नहीं  हैं    तेरे  पास ;
इस   दुनिया  में  अब  कुछ  लोग ,
दुश्मन  बन  गए ..तो  क्या  हुआ ?

यूँ  तो  मर्यादों  में  रहना ,
खूब  आता  है  तुझको ;
कुछ  पल  यूँ  मौज  में ..
बहक  गए  ..तो  क्या  हुआ ?

हर  पल  जो  बेतहासा  दौड़ती  रहती  है ,
आराम  की  तलाश  में ;
थक   कर  कुछ  पल  वो  कदम .
ठहर  गए  तो  क्या  हुआ . .??

महकती  रहती  है  तेरी  बगिया, 
खुशियों  के  फूलों  से ;
हाथों  में  कुछ  दुःख   के  कांटें ..
चुभाक   गए  तो  क्या  हुआ ?

क्या  हुआ  जो  ..
नम हो  गयी  तेरी  आँखें ;
खैर ..खुशियों  के  कुछ  आंसू ,
छलक   गए  तो  क्या  हुआ ?
क्या  हुआ ?..क्या  हुआ ?



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