घुप अँधेरे में गुम,
हम अपनी दिशा धुंध लेंगे;
अपने वजूद की महिमा ,
अपनी गरिमा धुंध लेंगे ।
जो रोपे थे हमनें पौधे ,
अब तक नहीं हैं मुरझायें ;
हम बेरंग नहीं ,
बस अब तक अपने रंग में नहीं आये ।
बहुत हो चुकी मरने की बातें ,
अब जीवन का श्रोंत
अपनी जिजीविषा धुंध लेंगे
मेरे जज्बों ,मेरे हौसलों से,
मुझे धोखा ना मिला ;
बस समय पर किस्मत का साथ और
मेहनत का मौका ना मिला
क्या हुआ गर कुछ क्षण बीत गए,
कुछ मौके छुट गए ,
नए अवसर फिर से आयेंगे ,
हैं तैयार ,इस बार नहीं गवाएंगे ;
जो ना भी आये तो गम नहीं
है यकीं ,
अपने मौके हम खुद बनायेंगे ;
राह की हर बाधा से टकरायेंगे ,
पर सजाये हैं जो सपने
वो पुरे कर के दिखायेंगे
हमारे सपने रेत पर बने चित्र ,
पानी पर खिची लकीर नहीं ,
और अपनी मंजिल ना पा सकें,
ऐसी भी ख़राब हमारी तकदीर नहीं
जो तकदीर ने भी बदला रुख ,
तो उसे मोड़ देंगे ,
हौसलें बुलंद हैं अपने,
भाग्य के हर बेड़े को तोड़ देंगे ।
कसम है हमें इश्वर की,
अपना चरित्र इतना ऊँचा बनायेंगे,
की रास्ते अपने आप बनते जायेंगे,
हम नहीं जायेंगे ,
मंजिल खुद
हमारे कदम चूमने आयेंगे ।।।


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