Monday, October 11, 2010

मशीनों सा .....

गुमाँकरते हो जिस पर तुम , धोखा वही देता है ।
यहाँ हर वक्त ,हर एक व्यक्ति ,बस एक अभिनेता है ॥

जो कहते हैं की - हे इश्वर ! यह जीवन क्यूँ देता है ।
वही शख्स साँसों की खातिर,कई जीवन ले लेता है ॥

उजालों में हर एक दानी ,जितना तुम्हें देता है ।
अंधेरों में वही व्यक्ति दुगना ले लेता है ॥

यहाँ हर शख्स शराबी है , हर वक्त वो पीता है ।
अगर है होश में ,तो बोलो क्यूँ ,मुखौटों में जीता है ॥

होता नही हर व्यक्ति राम, हर औअरत नही सीता है ।
है कहाँ रामायण तेरे घर में ,किस कोने में गीता है ॥

पर सच है आज,जो इंसा ,मशीनों सा मिलता है ।
मशीनों सा चलता है ,कल-पुर्जों सा हिलता है ...


हार गयें हैं बाकी सब , वही शख्स सिर्फ़ जीता है ॥
वही शख्स सिर्फ़ जीता है ॥

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