Monday, October 11, 2010

tamannaaon ki udaan

तमन्नाओं की उड़ान को  जो,
पर उठाना हमने  चाह  तो,
पर ही हमें कटे मिले

भाग्य को ललकार कर, भुजाओं को संभाल कर ,
दर्द को दबाकर  और, ओज को निकल कर
कर्म को जो इश्वर बनाना चाह ,तो
हाथ ही कटे मिले...
तमन्नाओं की उड़ान को जो.....
हौसले बुलंद हैं अब भी ,तैयार सहने को दंड हैं
है ये विश्वास , न की मेरा घमंड है ;
इस पर भी जो मुस्कुराना चाहा ,तो
होंठ ही सिले मिले ..
तमन्नाओं की उड़ान को ....

प्यार से हुंकार कर,दिल को बेकरार कर
प्यार से जो प्यार को पाना चाहा,तो
प्यार में भी दागे मिले  .
 तमनाओं की उड़ान को .....

जीवन से हारकर,धैर्य से तकरार कर
दिल से निकली ये आह
कोई तो ऐसा मिले,जो हम से भी गले मिले
तमन्नाओं की उड़ान को ...

तब अँधेरे में एक गूंज उठी
"जीवन में प्यार अब भी है
जंग की दरकार  अब भी है
हमें तुम पर ऐतबार अब भी है . "

ये सुनाई  दी जो एक साज थी
मेरे दोस्तों की आवाज़ थी
जो मेरे दिल के सबसे पास थी

हाँ,इस भरी  दुनिया में 
दूर किये जिसने शिकवे गिले 
-मेरे दोस्त..मेरे दोस्त ही सगे मिले
बस दोस्त ही सच्चे मिले ..

तमन्नाओं की उड़ान को जो 
पर उठाना हमने चाहा तो
पर तो हमें कटे मिले..
पर ..उस पर को संभाले हुए ..
मेरे दोस्त ही डटे
  मिले ..डटे मिले....

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