Monday, October 11, 2010

dvand nahi hai ye aanand

झूठ  की  कालिमा  में  ही  सत्य  का  प्रकाश  नजर  आता  है
है शैतान का अस्तित्व तभी तो इंसान अच्छा कहलाता है
जो न हो दो विचार तो  एक बहाव में मानव बह जाता है
और लावन ही हमें जल का महत्व बतलाता है

पतझड़ है तभी तो सावन का आगमन हमें हर्षाता है
दुःख है तो वह हमें सुख से भी मिलवाता  है
और बाधक ही सही रास्ते की पहचान करवाता है

माया है तभी तो उससे परे भक्ति अनमोल कहलाती है
है निस्पन्दाता आभास तभी तो चंचलता हमें लुभाती है
इन विप्रार्थक छंद से ही तो पद्द अलंकृत हो पाता है
मानव का घमंड प्रमाण है की वो  निम्न कोटि में आता है
और जिसके  खंड नहीं वह पूर्ण भी खंडित कहलाता है

मानव श्रृष्टि को ये उसका दंड नहीं
वो तो वरदानी दाता है
यह द्वन्द ,द्वन्द नहीं ,यह तो सबके ऊपर
उसके अस्तित्व को जतलाता है

यह उसे नहीं ,यह तो हमें आनंद  प्रदान करता जाता है
करता जाता है ..करता जाता है ...

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