झूठ की कालिमा में ही सत्य का प्रकाश नजर आता है
है शैतान का अस्तित्व तभी तो इंसान अच्छा कहलाता है
जो न हो दो विचार तो एक बहाव में मानव बह जाता है
और लावन ही हमें जल का महत्व बतलाता है
पतझड़ है तभी तो सावन का आगमन हमें हर्षाता है
दुःख है तो वह हमें सुख से भी मिलवाता है
और बाधक ही सही रास्ते की पहचान करवाता है
माया है तभी तो उससे परे भक्ति अनमोल कहलाती है
है निस्पन्दाता आभास तभी तो चंचलता हमें लुभाती है
इन विप्रार्थक छंद से ही तो पद्द अलंकृत हो पाता है
मानव का घमंड प्रमाण है की वो निम्न कोटि में आता है
और जिसके खंड नहीं वह पूर्ण भी खंडित कहलाता है
मानव श्रृष्टि को ये उसका दंड नहीं
वो तो वरदानी दाता है
यह द्वन्द ,द्वन्द नहीं ,यह तो सबके ऊपर
उसके अस्तित्व को जतलाता है
यह उसे नहीं ,यह तो हमें आनंद प्रदान करता जाता है
करता जाता है ..करता जाता है ...
Monday, October 11, 2010
dvand nahi hai ye aanand
Posted by figments89 at 1:41:00 AM
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